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राजस्थान मालवा की तर्ज पर निमाड के साथ खंडवा में भी उत्साह के साथ मनाया जा रहा है गणगौर पर्व।

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राजस्थान मालवा की तर्ज पर निमाड के साथ खंडवा में भी उत्साह के साथ मनाया जा रहा है गणगौर पर्व।

गणगौर महोत्सव में शामिल हुए मंत्री, सांसद, विधायक, महापौर, मातृशक्ति संग साझा किया उत्सव का उल्लास।

खंडवा। चैत्र शुक्ल में नवरात्रि पर्व के साथ गणगौर का पर्व बड़े धार्मिक उत्साह के साथ निमाड़ में मनाया जा रहा है। राजस्थान के साथ हमारा सांस्कृतिक गणगौर तीज का पर्व मालवा और निमाड में भी मनाया जा रहा है। समाजसेवी सुनील जैन ने बताया कि गणगौर पर्व का प्रारंभ होली पूर्णिमा के दूसरे दिन से प्रारंभ होता है, विवाहित महिलाओं को सौभाग्य प्रदान करने वाला तथा अविवाहित कन्याओं को उत्तम वर प्राप्ति का आशीर्वाद देने वाला यह पर्व है। इस पर्व पर गण (शिव) और गौर (पार्वती) का पूजन किया जाता है। इस पर्व का समापन चैत्र शुक्ल की तीज के दिन होता है। लेकिन हमारे खंडवा जिले में तीज के साथ यह  दो दिनों तक और आगे मनाया जाता है। प्राचीन परंपरा अनुसार होली की राख से कंकड़ उठाकर होली के दूसरे दिन से इस व्रत का प्रारंभ करते हैं इस दिन जवारे बोए जाते हैं एवं प्रतिदिन इसे सींचा जाता है। तीज के दिन शहर के कई स्थानों पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मातृ शक्ति ने उपस्थित होकर गणगौर की पूजा अर्चना की। अलग-अलग स्थानो पर जिले के जन प्रतिनिधि मंत्री विजय शाह, सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल, जिला अध्यक्ष राजपाल सिंह तोमर, जिला पंचायत अध्यक्ष पिंकी सुदेश वानखेडे, महापौर अमृता अमर यादव, खंडवा विधायक कंचन मुकेश तनवे, पंधाना विधायक छाया मोरै, मांधाता विधायक नारायण पटेल ने गणगौर पर्व की जिले वासियों को शुभकामना देते हुए गणगौर माता की पूजा अर्चना एवं आरती की। लोकसभा क्षेत्र के ग्राम सीवना, बमनाला एवं छेगांवमाखन में आयोजित पावन गणगौर महोत्सव में जनप्रतिनिधि ज्ञानेश्वर पाटिल, विधायक छाया मोरै एवं बरुड़ में विधायक कंचन मुकेश तनवे ने सहभागिता कर क्षेत्रवासियों के साथ इस सांस्कृतिक पर्व का आनंद लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मातृशक्ति और ग्रामीणजन उपस्थित रहे, जहां पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ गणगौर पर्व मनाया गया।
महोत्सव के दौरान लोकगीतों, पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक गतिविधियों की मनोहारी झलक देखने को मिली। महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में सजकर गणगौर माता की आराधना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। इस अवसर पर ज्ञानेश्वर पाटिल ने कहा कि गणगौर पर्व हमारी समृद्ध लोकसंस्कृति और परंपराओं का प्रतीक है, जो समाज में एकता और श्रद्धा का संदेश देता है। उन्होंने माँ गणगौर से क्षेत्रवासियों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना की। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने सभी नागरिकों को गणगौर महोत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और ऐसे आयोजनों को सामाजिक समरसता व सांस्कृतिक संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण बताया।

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